हिमालय का यह दुर्लभ पशु है बेशकीमती

कस्तुरी कुंडल बसै,मृग ढूढ़ै वन माहि ऐसे घट घट राम हैं, दुनिया देखे नाहि।

हिमालय में ऐसे कई जीव-जंतु हैं, जो बहुत ही दुर्लभ है। उनमें से एक दुनिया का सबसे दुर्लभ जीव है कस्तुरी मृग।

कस्तूरी हिरण

यह उत्तर पाकिस्तान, उत्तर भारत, चीन, तिब्बत, साइबेरिया, मंगोलिया में भी पाया जाता है। यह लुप्तप्राय जीव,भारत में कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तरांचल के केदारनाथ, फूलों की घाटी, हरसिल घाटी तथा गोविन्द वन्य जीव विहार एवं सिक्किम के कुछ क्षेत्रों तक ही सीमित रह गया है। इसे हिमालयन मस्क डियर के नाम से भी जाना जाता है। कस्तूरी मृग का नाम इसलिए पड़ा कि इसकी नाभि से कस्तूरी निकलती है। इस मृग की कस्तूरी बहुत ही सुगंधित और औषधीय गुणों से युक्त होती है।

उत्तराखंड राज्य का राजकीय पशु भी है कस्तूरी हिरण। इसका रंग भूरा और उस पर काले काले-पीले धब्बे होते हैं। यह हिरण सींगविहीन होते है। नर के दो पैने दाँत जबड़ों से बाहर निकले रहते है। इन दांतो का उपयोग यह स्वसुरक्षा और भोजन को खोजने में करता है । इस मृग का शरीर बालों से ढ़का रहता है। मादा हिरणी वर्ष में एक या दो बार 1-2 शावकों को जन्म देती है। इस मृग में सामानयतः 30 से 45 ग्राम तक कस्तूरी पायी जाती है। और ये बहुमुल्य कस्तूरी एक साल की आयु के बाद ही बननी प्रारम्भ होती है।

कस्तुरी हिरण की घ्राणशक्ति तेज होती है। जो इसे किसी भी प्रकार के खतरे को भांपकर भागने में मदद करती है। लेकिन दौड़ते समय पीछे मुड़कर देखने की गलत आदत ही इसके जीवन के लिए खतरा बन जाती है। ग्लोबल वार्मिंग, बरसात का मौसम, बेशकीमती कस्तूरी, रोगप्रतिरोधक क्षमता में कमी और संरक्षण के अभाव के कारणवश दुर्लभ जीव की श्रेणी में आ चुका है।

विलुप्ती का कागार पर (गुगल से प्राप्त फोटो)

कस्तूरी मृग से प्राप्त पदार्थ चॉकलेटी रंग की होती है, जो हिरण के जननांग के निकट एक थैली के अंदर द्रव रूप में पाई जाती है। इसे निकालकर व सुखाकर उपयाग किया जाता है। कस्तूरी मृग से मिलने वाली कस्तूरी की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनुमानित 30 से 40 लाख रुपए प्रति किलो है।

उत्तराखंड राज्य का राजकीय पशु

आयुर्वेद और .यूनानी चिकित्सा पद्धती में कई कठिन रोगों के उपचार मे इसका उपयोग होता है।कस्तूरी का उपयोग कई चमत्कारिक, धार्मिक, तांत्रिक और सांसारिक लाभ में भी होता है।

भारत सरकार ने भी वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट के अंतर्गत इसके शिकार को अपराध घोषित कर दिया गया है । यदि अभी भी कस्तूरी मृग को बचाने के प्रयास गंभीरता से नहीं किये गये तो इस दुर्लभ प्राणी को बस मल्टिमिडिया के माध्यम से ही देख पाएंगें।

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